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अवसाद

    

अवसाद या यू कहे डिप्रेशन.....
वैसे अगर देखा जाए तो यह भी एक तरह की मन:स्थिति है, परंतु इसमें ऐसा क्या है जो यह किसी भी व्यक्ति को पूरी तरह तोड़ देता है या फिर किसी गलत कदम की ओर अग्रसर कर देता है?
सामान्यतः कोई भी मनुष्य अपने किसी भी शत्रु से मुकाबला कर सकता है वह उसमें अपनी शत-प्रतिशत शक्ति का प्रयोग कभी नहीं करता है, अब चाहे वह शारीरिक शक्ति हो या मानसिक शक्ति।


              परंतु जब एक व्यक्ति किसी अवसाद से ग्रस्त होता है तो उस व्यक्ति की संपूर्ण शक्ति उसी के विरुद्ध कार्य करना प्रारंभ कर देती है और अब वह मनुष्य उसी स्थिति में और गहरा डूबता जाता है क्योंकि जब किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध उसी के समान शक्ति नकारात्मक प्रभाव से कार्य करती है तो वह व्यक्ति उसका सामना नहीं कर पाता है ।

              ऐसी स्थिति में मनुष्य को न केवल जिस वजह से इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है उनसे दूर रहना चाहिए, अपितु शांत रहकर स्वयं को एक नई दिशा प्रदान करनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से उस व्यक्ति में नई आशाओं का संचार होगा और यही नई आशाएं व स्वजनों का प्रेम ही किसी भी व्यक्ति को किसी भी अवसाद से मुक्त करा सकते है और नई उपलब्धियों तक पहुंचा सकते है

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