Skip to main content

Posts

Showing posts from September, 2020

कर्म

                                             कर्म ........................................................................................................................................................................ गीता में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं- वास्तव में सभी कर्म प्रकर्ति के गुणों द्वारा किये हुए हैं अज्ञानता से भरा हुआ अज्ञानी मनुष्य ये मैं कर रहा हूँ ऐसा मान लेता है। कर्म का अर्थ है चलना या हरकत करना । कर्म पांच प्रकार के होते हैं -ऊपर फेकना ,नीचे गिराना ,सिकोड़ना,फैलाना एवं गमन करना। मनुष्य के कर्म पाप और पुण्य से युक्त होते हैं ।सभी प्रकार के कर्म रजोगुण के द्वारा किये जाते हैं,बिना रजोगुण के कोई क्रिया नही होती है। रजोगुण का जब सत्वगुण के साथ संबंध होता है तो ज्ञान धर्म वैराग्य में वृद्धि होती है । तथा रजोगुण का तमोगुण के साथ संबंध होने पर अज्ञान अधर्म अवैराग्य आदि कर्मो में प्रवृति होती है। यही दोनों प्रकार के कर्म ...