Skip to main content

भारत-चीन और गलवान घाटी

                                भारत-चीन और गलवान घाटी

 

            ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:- ऐतिहासिक रूप से यदि देखा जाये तो भारत और चीन दोनो ही विश्व की सबसे प्राचीनतम सभ्यताएं है और दोनों ही अग्रेंजो का उपनिवेश रहे है। दोनो ने आजादी की लडाई लड़ी और स्वतंत्रता भी लगभग एक ही समय मिली। दोनो की इसी समानता को देखकर पण्डित जवाहरलाल नेहरू ने हिन्दी-चीनी भाई भाई का नारा दिया।
औपनिवेशिकरण के दौरान ही अग्रेंजो ने भारत और चीन के मध्य एक सीमा का निर्धारण किया जिसे line of Actual Control के नाम से जाना जाता है परन्तु चीन इस सीमा को मानने के इन्कार करता रहा है और यहीं से ही सीमा विवाद का जन्म होता है। यह विवाद कभी तिब्बत के रूप मे, कभी अरूणाचल प्रदेश तो कभी सियाचिन और लद्दाख की पैंगाग झील के रूप मे हमारे सामने आता है और चीन भारतीय सम्प्रभु क्षेत्रों मे अक्सर अपना दावा करता रहा है। इसी के चलते चीन ने लद्दाख के पूर्व का क्षेत्र अपने कब्जे मे ले लिया जिसे आज अक्साई चीन के नाम से जाना जाता है। यह क्षेत्र कुल कश्मीर का लगभग 17% है।

विवाद का वर्तमान कारण:- भारत-चीन विवाद का वर्तमान कारण 'दर्बुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी' रोड है जो लेह से लेकर दौलत बेग ओल्डी सिटी तक 255km लम्बा तथा 4000-5000 मीटर ऊँचा है। यह रोड भारत की सामरिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है परन्तु चीन शुरू से ही इसका विरोध करता आया है क्योंकि इसके कारण काराकोरम रेंज मे चीन की निगरानी बहुत कम हो जायेगी और भारतीय परिपेक्ष्य मे चीन की स्थिति कमजोर होगी।

गलवान घाटी की भूमिका एवं वर्तमान स्थिति :- गलवान घाटी LOC के निकटतम वह क्षेत्र है जो दौलत बेग ओल्डी रोड तक चीन का रास्ता सुगम बनाता है। इसलिए गलवान घाटी चीन एवं भारत के लिए एक HOTSPOT बन गयी है। वर्तमान में यहाँ खूनी संघर्ष जारी है और चीनी सैनिक लगातार युद्धगामी गतिविधियों को अन्जाम दे रहे हैं। इसके चलते ही लगभग 40 साल बाद भारत चीन के बीच झडप मे 3 भारतीय सैनिक शहीद हो गये।

 

            भारत का रुख:- भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह यथास्थिति को बहाल करने से नीचे कुछ भी स्वीकार नही करेगा और जब तक चीन LAC के पास भारत के क्षेत्र से अपनी सेना, बमवर्षक विमान, जैमर और अन्य हथियारों को नही हटा लेता भारत भी वहाँ से एक कदम पीछे नही हटेगा।
भारत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह LAC के अपने तरफ के निर्माण की गतिविधियों को किसी भी कीमत पर नही रोकेगा क्योकि यह भारत का सम्प्रभु क्षेत्र है जिसका वह हकदार है। अर्थात् भारत किसी भी तरीके का कोई समझौता नही करेगा।

 

             आगे की राहः- दोनो ही देश विश्व की बडी अर्थव्यवस्था एवं शक्ति है तथा दोनो के एक दूसरे मे परस्पर हित समाहित है इसलिए कूटनीतिक आधार पर बातचीत करके ही मामले को सुलझाया जाये। इसके लिए loc को स्पष्ट किया जाये तथा दोनो देशों के सैन्य बलों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता के लिए साल मे एक या दो बार कमाण्ड स्तर की बैठक का आयोजन किया जाये।
दोनों पक्षों के बीच जो रणनीति अविश्वास बढा है उसे दूर करने के प्रयास किए जाये एवं एक दूसरे की सम्प्रभुता का सम्मान किया जाये।

जय हिंद की सेना🇮🇳    🇮🇳

Comments

Popular posts from this blog

कर्म

                                             कर्म ........................................................................................................................................................................ गीता में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं- वास्तव में सभी कर्म प्रकर्ति के गुणों द्वारा किये हुए हैं अज्ञानता से भरा हुआ अज्ञानी मनुष्य ये मैं कर रहा हूँ ऐसा मान लेता है। कर्म का अर्थ है चलना या हरकत करना । कर्म पांच प्रकार के होते हैं -ऊपर फेकना ,नीचे गिराना ,सिकोड़ना,फैलाना एवं गमन करना। मनुष्य के कर्म पाप और पुण्य से युक्त होते हैं ।सभी प्रकार के कर्म रजोगुण के द्वारा किये जाते हैं,बिना रजोगुण के कोई क्रिया नही होती है। रजोगुण का जब सत्वगुण के साथ संबंध होता है तो ज्ञान धर्म वैराग्य में वृद्धि होती है । तथा रजोगुण का तमोगुण के साथ संबंध होने पर अज्ञान अधर्म अवैराग्य आदि कर्मो में प्रवृति होती है। यही दोनों प्रकार के कर्म ...

अवसाद

     अवसाद या यू कहे डिप्रेशन ..... वैसे अगर देखा जाए तो यह भी एक तरह की मन:स्थिति है, परंतु इसमें ऐसा क्या है जो यह किसी भी व्यक्ति को पूरी तरह तोड़ देता है या फिर किसी गलत कदम की ओर अग्रसर कर देता है? सामान्यतः कोई भी मनुष्य अपने किसी भी शत्रु से मुकाबला कर सकता है वह उसमें अपनी शत-प्रतिशत शक्ति का प्रयोग कभी नहीं करता है, अब चाहे वह शारीरिक शक्ति हो या मानसिक शक्ति।                  परंतु जब एक व्यक्ति किसी अवसाद से ग्रस्त होता है तो उस व्यक्ति की संपूर्ण शक्ति उसी के विरुद्ध कार्य करना प्रारं भ कर देती है और अब वह मनुष्य उसी स्थिति में और गहरा डूबता जाता है क्योंकि जब किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध उसी के समान शक्ति नकारात्मक प्रभाव से कार्य करती है तो वह व्यक्ति उसका सामना नहीं कर पाता है ।               ऐसी स्थिति में मनुष्य को न केवल जिस वजह से इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है उनसे दूर रहना चाहिए, अपितु शांत रहकर स्वयं को एक नई दिशा प्रदान करनी चाहिए क्यों...